शरद पवार का खुलासा: मुस्लिम इलाके में 12वें धमाके का जिक्र कर मुंबई को दंगों से बचाया था, भाजपा ने घेरा  


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जलगांव
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 15 Apr 2022 08:10 PM IST

सार

पवार ने कहा कि उन्होंने तब कहा था कि मुंबई में 12 जगहों  पर बम विस्फोट हुए थे क्योंकि वह शहर में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के इरादे को विफल करना चाहते थे। 
 

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राकांपा प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि उनके इस बयान से कि 12 मार्च, 1993 को मुस्लिम बहुल इलाके में भी विस्फोट हुआ था, मुंबई में सांप्रदायिक दंगा भड़कने से बचा था। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को पवार के 29 साल पहले जानबूझकर दिए गलत बयान की आलोचना की थी और पवार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

पवार के बयान पर फडणवीस का पलटवार 
12 मार्च 1993 को जब मुंबई 12 बम धमाकों से हिल गई थी, तब शरद पवार ने एक मुस्लिम इलाके में 13वें विस्फोट का आविष्कार किया था। कानून-व्यवस्था के बजाय तुष्टीकरण उनकी पहली प्राथमिकता थी। जब हम सांप्रदायिक सौहार्द की उम्मीद करते हैं तो ऐसा दोहरा मापदंड क्यों? फडणवीस ने कई ट्वीट कर पवार को निशाने पर लिया। जलगांव में आरोपों के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर पवार ने कहा कि उन्होंने तब कहा था कि मुंबई में 12 जगहों  पर बम विस्फोट हुए थे (हालांकि वास्तव में 11 स्थानों से विस्फोटों की सूचना मिली थी), क्योंकि वह बाहरी ताकतों के शहर में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के इरादे को विफल करना चाहते थे। 

12वें स्थान के रूप में मुस्लिम इलाके का जिक्र किया
पवार ने कहा- एक आरोप जो उन्होंने लगाया, वह यह है कि मैंने कहा था था कि 11 के बजाय 12 स्थानों पर बम धमाके हुए थे। मैंने 12वें स्थान के रूप में एक मुस्लिम इलाके का जिक्र किया था, यह बात एक सौ प्रतिशत सही है, मैंने ऐसा कहा था। क्योंकि जिन 11 जगहों पर विस्फोट हुए थे उनमें सिद्धविनायक मंदिर जैसे हिंदुओं के महत्वपूर्ण स्थान भी थे।

राकांपा प्रमुख ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से धमाकों में इस्तेमाल सामग्री की जांच की थी जो भारत में नहीं बल्कि कराची में बनाई गई थी। इसका मतलब था कि एक पड़ोसी देश हिंदुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहता था और मुंबई में आग लगाना चाहता था। इसमें स्थानीय मुसलमान शामिल नहीं थे। मैंने कहा था कि 12वें धमाके वाली जगह मोहम्मद अली रोड है। इसकी वजह से सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। 

पवार ने कहा, इस घटना की जांच करने वाले न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण आयोग ने कहा था कि अगर उन्होंने (पवार) यह स्टैंड नहीं लिया होता, तो मुंबई जल जाती। फडणवीस पर पलटवार करते हुए पवार ने कहा कि  हमें उन लोगों के बयानों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, जिन्हें समझ नहीं है और जो इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझते हैं।

महाराष्ट्र और बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों को दुरुपयोग हो रहा: पवार
पवार ने भाजपा पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल किया जा रहा क्योंकि केंद्र में जो शासन कर रहे हैं वे किसी भी हाल में इन दो राज्यों की सत्ता चाहते हैं। पवार ने कहा कि मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) और भाजपा जैसी पार्टियों द्वारा मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर दिए गए हालिया बयान से राज्य का महौल खराब हो सकता है।

विस्तार

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि उनके इस बयान से कि 12 मार्च, 1993 को मुस्लिम बहुल इलाके में भी विस्फोट हुआ था, मुंबई में सांप्रदायिक दंगा भड़कने से बचा था। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को पवार के 29 साल पहले जानबूझकर दिए गलत बयान की आलोचना की थी और पवार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

पवार के बयान पर फडणवीस का पलटवार 

12 मार्च 1993 को जब मुंबई 12 बम धमाकों से हिल गई थी, तब शरद पवार ने एक मुस्लिम इलाके में 13वें विस्फोट का आविष्कार किया था। कानून-व्यवस्था के बजाय तुष्टीकरण उनकी पहली प्राथमिकता थी। जब हम सांप्रदायिक सौहार्द की उम्मीद करते हैं तो ऐसा दोहरा मापदंड क्यों? फडणवीस ने कई ट्वीट कर पवार को निशाने पर लिया। जलगांव में आरोपों के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर पवार ने कहा कि उन्होंने तब कहा था कि मुंबई में 12 जगहों  पर बम विस्फोट हुए थे (हालांकि वास्तव में 11 स्थानों से विस्फोटों की सूचना मिली थी), क्योंकि वह बाहरी ताकतों के शहर में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के इरादे को विफल करना चाहते थे। 

12वें स्थान के रूप में मुस्लिम इलाके का जिक्र किया

पवार ने कहा- एक आरोप जो उन्होंने लगाया, वह यह है कि मैंने कहा था था कि 11 के बजाय 12 स्थानों पर बम धमाके हुए थे। मैंने 12वें स्थान के रूप में एक मुस्लिम इलाके का जिक्र किया था, यह बात एक सौ प्रतिशत सही है, मैंने ऐसा कहा था। क्योंकि जिन 11 जगहों पर विस्फोट हुए थे उनमें सिद्धविनायक मंदिर जैसे हिंदुओं के महत्वपूर्ण स्थान भी थे।

राकांपा प्रमुख ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से धमाकों में इस्तेमाल सामग्री की जांच की थी जो भारत में नहीं बल्कि कराची में बनाई गई थी। इसका मतलब था कि एक पड़ोसी देश हिंदुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहता था और मुंबई में आग लगाना चाहता था। इसमें स्थानीय मुसलमान शामिल नहीं थे। मैंने कहा था कि 12वें धमाके वाली जगह मोहम्मद अली रोड है। इसकी वजह से सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। 

पवार ने कहा, इस घटना की जांच करने वाले न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण आयोग ने कहा था कि अगर उन्होंने (पवार) यह स्टैंड नहीं लिया होता, तो मुंबई जल जाती। फडणवीस पर पलटवार करते हुए पवार ने कहा कि  हमें उन लोगों के बयानों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, जिन्हें समझ नहीं है और जो इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझते हैं।

महाराष्ट्र और बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों को दुरुपयोग हो रहा: पवार

पवार ने भाजपा पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल किया जा रहा क्योंकि केंद्र में जो शासन कर रहे हैं वे किसी भी हाल में इन दो राज्यों की सत्ता चाहते हैं। पवार ने कहा कि मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) और भाजपा जैसी पार्टियों द्वारा मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर दिए गए हालिया बयान से राज्य का महौल खराब हो सकता है।



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