आसान दिखने वाली मसाला फिल्मों में ज्यादा मेहनत लगती है: कार्तिक आर्यन


कभी ‘पंचनामा’ वाला लड़का और मोनोलॉग वाला लड़का कहे जाने वाले कार्तिक आर्यन ने फिल्म ‘सोनू की टीटू’ की स्वीटी से दर्शकों के दिल में ऐसी जगह बनाई कि वह आज की पीढ़ी के हरदिलअजीज ऐक्टर्स में शामिल हो गए। जल्द ही फिल्म ‘भूल भुलैया 2’ (Bhool Bhulaiyaa 2) में नजर आने वाले कार्तिक की आने वाली फिल्मों की लिस्ट में शहजादा, कैप्टन इंडिया, सत्यनारायण की कथा, फ्रेडी जैसे चर्चित नाम शामिल है। पेश है, उनके इस शानदार सफर पर एक खास बातचीत:

पांच साल पहले तक आप लोगों के लिए पंचनामा वाला लड़का हुआ करते थे, वहां से इस हरदिलअजीज कार्तिक आर्यन तक के सफर को आप कैसे देखते हैं?
आप सही कह रही हैं। लोगों को मेरा नाम ही नहीं पता था। वो मोनोलॉग वाला लड़का कहते थे। पंचनामा 2 के हिट होने के बाद भी मैं ऑडिशन देता रहता था। लोग तब मेरा नाम तक नहीं जानते थे। उन्हें मेरा नाम सोनू की टीटू की स्वीटी के बाद पता चला। जबकि, उससे पहले मैं चार-पांच फिल्में कर चुका था, शुरू की कुछ फिल्में नहीं चली, तो वो अगल प्रेशर होता है, लेकिन मेरे लिए धैर्य ही सफलता की कुंजी रही है। मैंने कभी अपने ऊपर मेहनत करना नहीं छोड़ा। कई बार क्या होता है कि आप बैकफुट पर आ जाते हैं और सोचने लगते हैं कि यार, मैं वापस चला जाता हूं, मगर मैं हमेशा यही सोचता था कि ये लोग अभी नहीं समझ रहे हैं, बाद में समझेंगे। मैं नए ऐक्टर्स को भी यही कहना चाहूंगा कि कड़ी मेहनत करना न छोड़े और सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान दें कि भले ही मैं अभी वहां नहीं पहुंच पा रहा, रोड़े आ रहे हैं, लेकिन मैं पहुंच जाऊंगा। मेरी सोच यही रही कि अभी नहीं हो रहा तो कोई बात नहीं, धीरे-धीरे मैं पहुंच जाऊंगा।

‘भूल भुलैया 2’ का ट्रेलर आने के बाद से कहा जा रहा है कि आपको आपका मनचाहा मैदान मिल गया है। कॉमिडी, डांस, रोमांस आपके बाएं हाथ का खेल है। क्या वाकई ऐसा है? दूसरे, मसाला एंटरटेनर फिल्मों को आसान माना जाता है, इस पर आपकी क्या राय है?
मेरे हिसाब से कॉमिडी सबसे मुश्किल जॉनर है। कॉमिडी करते वक्त आप कई बार ऊपर या नीचे चले जाते हैं। उसमें एक बहुत बारीक लाइन पकड़कर रखनी होती है, जो बहुत मुश्किल काम है। इसीलिए, इतनी सारी कॉमिडी फिल्में बनती हैं, पर चलती कुछ ही हैं। हां, ये जरूर है कि मेरे अंदर नैचरली एक कॉमिक टाइमिंग है, तो कॉमिडी का फ्लो सही रहता है। आप यकीन नहीं मानेंगी पर मेरे लिए इमोशनल सीन करना ज्यादा आसान होता है। मेरे डायरेक्टर खुश होते हैं, जब मुझे कोई रोने वाला सीन करना होता है, क्योंकि मैं वो सीन आसानी से कर देता हूं, तो कॉमिडी और इमोशनल ये दोनों ही चीजें मेरे में नैचरली आती हैं। लेकिन मेरा मानना है कि कॉमिडी सबसे मुश्किल है। वहीं, मेरे हिसाब से मेरा मैदान फैमिली ऑडियंस है। फैमिली ऑडियंस जैसी फिल्में देखना पसंद करती है, उन फिल्मों में वे मुझे देख पाती है। वो चाहे लुका छिपी हो, सोनू की टीटू की स्वीटी हो, पति पत्नी और वो हो, अब भूल भुलैया 2 और बड़े स्तर की फिल्म है और मैं उम्मीद करता हूं कि फैमिली ऑडियंस इसे भी सराहे।

आपने रोमांटिक फैमिली एंटरटेनर हीरो के रूप में तो अपनी जगह पक्की कर ली है। आगे अपने करियर को किस राह पर ले जाना चाहेंगे?
सबसे पहले तो मैं अपने फैंस का बहुत शुक्रगुजार हूं। जिस तरह से उन्होंने मुझे प्यार दिया है, मैं उन्हें वाकई बहुत प्यार करता हूं। कई बार मैं सोचता हूं कि मैंने तो अभी इतना काम भी नहीं किया, फिर भी वे मुझे इतना प्यार देते हैं, हमेशा सपोर्ट करते है। इससे मुझे कुछ और नया करने की हिम्मत मिलती है कि अच्छा, ऐसे किरदारों या फिल्मों में उन्होंने मुझे कुबूल किया है, तो आगे दूसरे अंदाज में भी मुझे पसंद करेंगे। उनके प्यार से मुझमें ये भरोसा आता है कि मैं अलग-अलग चीजें कर सकूं। मैंने ऐसा कुछ सोचा नहीं है कि मैं जॉनर बदलता रहूंगा। मैं बस अच्छी एंगेजिंग फिल्में करना चाहता हूं और मेरी आने वाली सभी फिल्में एंगेजिंग हैं। मैं ऐसे नहीं सोचता कि अभी रोमांटिक फिल्म कर रहा हूं तो अगली किसी और जॉनर ही हो। अगर मेरे पास लगातार तीन अच्छी रोमांटिक फिल्म आ जाए, तो मैं उसे छोड़ थोड़ी न दूंगा। मैं सिर्फ अच्छी स्क्रिप्ट पर जाता हूं।

आपको फैंस और इंडस्ट्री से बेशक काफी प्यार मिला है, पर कोविड के दौरान एक मु़श्किल दौर भी आया, जब खबरें आ रही थीं कि कई फिल्मों से आपको हाथ धोना पड़ा। उस दौर को कैसे हैंडल किया और क्या आपको लगता है कि आपको टारगेट किया गया?

यार, इसके बारे में मैं बोलना नहीं चाहूंगा। जब आज तक नहीं बोला तो अब क्यों बोलूं? (हंसते हैं) मैं इन चीजों के बारे में सोचने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना पसंद करता हूं।

ऐसी एक सोच है कि मसाला एंटरटेनमेंट फिल्मों में ज्यादा ऐक्टिंग नहीं करनी पड़ती, इंटेंस या गंभीर किरदार निभाने पर ही ऐक्टर को दाद दी जाती है।आप इससे कितने सहमत या असहमत हैं?
हां, ये सोच तो है। जैसे, जब मैं फिल्म धमाका करता हूं तो सब कहते हैं कि क्या ऐक्टर है। जब ऐसी फिल्में करता हूं तो सबको लगता है कि ये तो आसानी से हो जाता है। जबकि, असलियत ये है कि ये सब करना ज्यादा मुश्किल है। इसमें मेहनत ज्यादा लगती है। इसलिए मेरा मानना है कि दोनों ही तरह की फिल्मों को एक बराबर सराहा जाना चाहिए। हालांकि, मुझे इस सोच की वजह भी समझ में आती है। आप हंसी मजाक को सामान्य तरह से लेते हैं न, इसलिए ये फिल्में भी आसान लगती हैं, लेकिन मैं ईमानदारी से कह रहा हूं कि ये सबसे मुश्किल जॉनर है। वैसे, इस सोच के बावजूद आपको अपना हक मिलता है, क्योंकि जो लोग इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं, उनको पता है कि यार, ये इसने सही किया है। पर हां, अगर दोनों को थोड़ा बराबर समझा जाए तो बेहतर रहेगा। मैं तो हर तरह की फिल्में कर रहा हूं। मेरी आने वाली फिल्में कैप्टन इंडिया, शहजादा, सत्यनारायण की कथा, फ्रेडी सब एक दूसरे से बहुत अलग हैं।

ऐक्टर होने के चलते आपको लोगों का बेशुमार प्यार मिलता है, तो आपकी निजी जिंदगी भी चर्चा में रहती है। कुछ वक्त पहले आपके साथ भी ऐसा हुआ, खास तौर पर #सार्तिक (सारा-कार्तिक) को लेकर जो चर्चा हुई। जैसा कुछ लोग कहते हैं, वो सिर्फ प्रमोशन के लिए था या उसमें कुछ इमोशन भी था?
नहीं नहीं, ऐसा कुछ प्रमोशनल नहीं था। अब मैं इसे कैसे समझाऊं। नहीं, यार, मतलब हम सब भी इंसान ही हैं। हर चीज प्रमोशनल नहीं होती है। मैं इस बारे में इतना ही कहूंगा।

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