Monkeypox: मंकीपॉक्स के खतरे को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों को चिट्ठी लिख किया आगाह, रोकथाम के लिए दिए ये निर्देश


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दुनिया में मंकीपॉक्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को ही राज्यों को मंकीपॉक्स को लेकर आगाह किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों को चिट्ठी लिखकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है और मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा है। 

गौरतलब है कि भारत में लगातार मंकीपॉक्स को लेकर विदेश से आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। कुछ दिन पहले ही यूपी से लेकर केरल तक में कुछ लोगों में इसके लक्षण देखे गए। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में अभी तक इसके केसों की पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, मंकीपॉक्स पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला एक संक्रामक रोग है और इसके लक्षण चेचक के मरीजों के जैसे होते हैं।

दुनियाभर में तेजी से फैल रहे हैं मंकीपॉक्स के केस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में बताया था कि मंकीपॉक्स  पुष्ट मामलों की संख्या में 77 फीसदी की साप्ताहिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों की संख्या दुनियाभर में 6,000 से ज्यादा हो गई है। वहीं अफ्रीका के हिस्सों में दो और लोगों की इस वायरस से जान गई है।

मंकीपॉक्स के अधिकतर मामले यूरोप और अफ्रीका में आये हैं। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि यह रहस्यमयी बीमारी उन पुरुषों को प्रमुख रूप से प्रभावित करती है जिन्होंने पुरुषों के साथ ही यौन संबंध बनाये हैं, वहीं आबादी के अन्य समूहों में संक्रमण का कोई संकेत नहीं देखा गया। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि सोमवार तक उसने 59 देशों में मंकीपॉक्स के प्रयोगशालाओं में पुष्ट 6,027 मामले गिने हैं जिनमें 27 जून को समाप्त हुए सप्ताह में हुई आखिरी गिनती से 2,614 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। उसने कहा कि अब तक इस बीमारी से तीन लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें सभी अफ्रीका से थे।

उसने कहा कि नौ और देशों में संक्रमण के मामले आये हैं, वहीं 10 देशों में तीन सप्ताह से अधिक समय से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रस अधानोम घेब्रेयेसस ने बुधवार को कहा कि वह वायरस के प्रसार के स्तर को लेकर चिंतित हैं और 80 प्रतिशत से अधिक मामले यूरोप में आये हैं।

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दुनिया में मंकीपॉक्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को ही राज्यों को मंकीपॉक्स को लेकर आगाह किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों को चिट्ठी लिखकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है और मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा है। 

गौरतलब है कि भारत में लगातार मंकीपॉक्स को लेकर विदेश से आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। कुछ दिन पहले ही यूपी से लेकर केरल तक में कुछ लोगों में इसके लक्षण देखे गए। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में अभी तक इसके केसों की पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, मंकीपॉक्स पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला एक संक्रामक रोग है और इसके लक्षण चेचक के मरीजों के जैसे होते हैं।

दुनियाभर में तेजी से फैल रहे हैं मंकीपॉक्स के केस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में बताया था कि मंकीपॉक्स  पुष्ट मामलों की संख्या में 77 फीसदी की साप्ताहिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों की संख्या दुनियाभर में 6,000 से ज्यादा हो गई है। वहीं अफ्रीका के हिस्सों में दो और लोगों की इस वायरस से जान गई है।

मंकीपॉक्स के अधिकतर मामले यूरोप और अफ्रीका में आये हैं। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि यह रहस्यमयी बीमारी उन पुरुषों को प्रमुख रूप से प्रभावित करती है जिन्होंने पुरुषों के साथ ही यौन संबंध बनाये हैं, वहीं आबादी के अन्य समूहों में संक्रमण का कोई संकेत नहीं देखा गया। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि सोमवार तक उसने 59 देशों में मंकीपॉक्स के प्रयोगशालाओं में पुष्ट 6,027 मामले गिने हैं जिनमें 27 जून को समाप्त हुए सप्ताह में हुई आखिरी गिनती से 2,614 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। उसने कहा कि अब तक इस बीमारी से तीन लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें सभी अफ्रीका से थे।

उसने कहा कि नौ और देशों में संक्रमण के मामले आये हैं, वहीं 10 देशों में तीन सप्ताह से अधिक समय से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रस अधानोम घेब्रेयेसस ने बुधवार को कहा कि वह वायरस के प्रसार के स्तर को लेकर चिंतित हैं और 80 प्रतिशत से अधिक मामले यूरोप में आये हैं।



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